➡गाय और प्रकृति का अनन्याश्रित संबंध होने के कारण गोवंश की रक्षा से ही प्रकृति की रक्षा होगी : डॉ. वाजपेयी
➡धन्वंतरि पीठ: आयुषग्राम ट्रस्ट के संस्थापक एवं पूर्व उपाध्यक्ष, भारतीय चिकित्सा परिषद, उ. प्र. शासन, आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी की सदप्रेरणा से ट्रस्ट द्वारा संचालित आयुषग्राम गोसेवालय में गत वर्षों की भांति, इस वर्ष भी आज ”गोपाष्टमी महोत्सव” हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः समस्त आयुषग्राम परिसर को गाय के महत्व से संबन्धित आर्ष वाक्यों और चित्रों द्वारा सुसज्जित किया गया। इसके उपरांत, सभी अंतेवासियों एवं गुरुकुल के बटुकों एवं आचार्य गणों द्वारा सम्पूर्ण विधिविधान के साथ गोपूजन किया गया।
➡पूजन के उपरांत, उद्बोधन सत्र में आचार्य डॉ॰ वाजपेयी जी ने बताया कि भूमि, पृथ्वी, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार यह अष्टधा प्रकृति है तथा गाय और प्रकृति का अनन्याश्रित संबंध होता है। गाय और प्रकृति के मध्य इसी अनन्याश्रित संबंध का संदेश देते हुये भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक शुक्लपक्ष अष्टमी के दिन ही गोचारण लीला आरंभ की थी। गायों की रक्षा करने के कारण ही भगवान श्रीकृष्ण को ‘गोविंद’ भी कहा जाता है। इसके साथ-साथ, कार्तिक शुक्लपक्ष प्रतिपदा से सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इन्द्र द्वारा की गई अतिवृष्टि से गोप-गोपियों और गोवंश की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका पर धारण किया था और आठवें दिन, अर्थात, अष्टमी को देवराज इन्द्र अहंकार रहित होकर भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आए थे। तब से इस दिन को महोत्सव के रूप में मनाने के परंपरा चली आ रही है।
➡आचार्य वाजपेयी जी ने आगे कहा कि इस दिन बछड़े सहित गाय के पूजन का विधान है। इस दिन, प्रातःकाल नित्यकर्मों से निवृत्त होकर, स्नानादि करके गायों को स्नान कराकर गौमाता के अंगों में मेंहदी, हल्दी, रंग के छापे आदि लगाकर सजाया जाता है तथा उनको वस्त्रालंकारों से अलंकृत करके गंध, धूप-पुष्प आदि से पूजा की जाती है। इसके बाद, गौरक्षकों/गौपालकों को भी उपहार आदि देकर पूजन किया जाता है। इस दिन, गायों को गोग्रास देकर उनकी प्रदक्षिणा करने और थोड़ी दूर तक उनके साथ जाने से सभी प्रकार के अभीष्ट सिद्ध होते हैं। शाम को गायों के चरकर वापस आने के उपरांत, उस समय भी उनका अभिवादन और पंचोपचार पूजन करके भोजन कराया जाता है। इसके सौभाग्य की वृद्धि होती है।
➡उन्होने आगे बताया कि हमारी संस्कृति में गाय को माँ का स्थान दिया गया है क्योंकि यही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो आदिकाल से ही हमारे परिवार का अंग बनकर माँ के समान हमारा भरण-पोषण करती है। नवजात शिशुओं के लिए गौदुग्ध माँ के दूध के समान पोषक होता है। गोपाष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुये उन्होने कहा कि गोपाष्टमी यह संदेश देती है कि ब्रह्मांड में सभी कार्य भगवत सत्ता से ही सम्पन्न होते हैं। परंतु, मनुष्य अहंकारवश यह सोचता है कि सारे कार्य उसके द्वारा होते हैं। इसी भ्रम को दूर करने के लिए ईश्वर दु:ख और कष्ट भेजते हैं जिससे मनुष्य सावधान होकर इस अहंकार से मुक्त हो सके। जब मानव अपना अहंकार छोडकर परमात्मा की शरण में जाता है तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे सहज ही परमानंद की प्राप्ति हो जाती है।
➡इस महोत्सव पर, आयुषग्राम गुरुकुलम के प्रबन्धक श्री राम बहादुर त्रिपाठी, एडवोकेट, डॉ. अर्चना वाजपेयी, डॉ. वेदप्रताप वाजपेयी, प्रधानाचार्य, आयुषग्राम गुरुकुलम, आचार्य भूपेन्द्र कुमार पाण्डेय, उपप्रधानाचार्य, आयुषग्राम गुरुकुलम, श्री आलोक कुमार, श्री बाल्मीकि द्विवेदी, श्री राम उदय, सीमा, शालू, सहित समस्त अंतेवासी एवं स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
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