➡ ध्यान से सुने वीडियो ; इलाज मे किस गलती से माँ अपंग होती गयी कैसे चलने लगी 10 दिन मे ॥
➡मेरा नाम नीरज कुमार पटेल, मेरी माँ श्रीमती विद्या पटेल (उम्र ५३), हम लोग अमर पाटन, सतना (म.प्र.) से हैं।
➡४-५ साल पहले मेरी माँ का अचानक से पैर फिसल गया वे जमीन में गिर गयीं २-३ घण्टे होश नहीं आया, हम लोगों ने तुरन्त उठाया और आँखों में पानी के छीटे मारे होश तो आ गया किन्तु दोनों पैरों में झुंझुनाहट दर्द व और शून्य हो गये, हम लोगों ने अपने गाँव के डॉक्टर को दिखाया उन्होंने इंजेक्शन लगाया और दवायें दीं। ३-४ दिन तक लगातार इंजेक्शन लगाया तो थोड़ा आराम मिला। हमलोग १५ दिन तक घर में दवायें खिलाते रहे।
➡फिर हम माँ को अमर पाटन, सतना में प्राइवेट अस्पताल में दिखाया तो उन्होंने भी इंजेक्शन लगाया और दवायें दिया, जब तक दवा व इंजेक्शन लगते तो आराम मिलता फिर उसी तरह हो जाता था। ३-४ दिन पेन किलर खिलाते रहे।
➡फिर हम जबलपुर में नेता जी सुभाषचन्द्र बोस हॉस्पिटल में दिखाया वहाँ पर डायटिशियन के पास भेजा। डायटिशियन ने कहा कि शाम को केवल सलाद लेना है। जैसे- खीरा, मूली, टमाटर, सेव, अनार आदि आपको ३ माह तक सलाद पर रहना है। हम लोग कुछ दिन तक खिलाये तो वजन ७० से ७२ हो गया, कमजोरी, घबराहट, पैरों में दर्द, कमर में दर्द, शरीर में झुंझुनाहट काफी समस्या होने लगी, तब हम पेन किलर दिन में ५-६ बार देने लगे जूस, सेव, अनार प्रतिदिन २-२ किलो खिलाते थे।
➡जुलाई माह में अचानक से पैरों में दर्द व खिंचाव बढ़ गया तो हम नागपुर की तैयारी करने लगे।
➡तभी हमारे एक रिश्तेदार से मुलाकात हुयी जिनका इलाज आयुष ग्राम चित्रकूट में चल रहा है वे बिल्कुल ठीक हैं उन्होंने आयुष ग्राम ट्रस्ट सूरजकुण्ड रोड चित्रकूट के आयुष ग्राम चिकित्सालय के बारे में बताया।
➡अब हम ५ नवम्बर २०२१ को आयुष ग्राम सूरजकुण्ड रोड, चित्रकूट पहुँचे, वहाँ पर कुछ जाँचें करवायीं और समस्यायें पूछीं उस समय कमर से लेकर पैर तक दर्द, आइसक्रीम खाने से पैर शून्य हो गये थे, कमजोरी, घबराहट, भूख नहीं लगती थी आदि समस्यायें थीं।
➡आयुष ग्राम चिकित्सालय चित्रकूट में डॉ. साहब ने जब देखा फिर मुझसे कहा आप बिल्कुल परेशान न हों आपकी माँ ठीक हो जायेंगी। इन्हें १० दिन तक पंचकर्म कराना है और चिकित्सा होगी। हम लोग तुरन्त भर्ती हो गये, पंचकर्म और आयुर्वेदिक चिकित्सा हुयी, आयुष ग्राम चिकित्सालय चित्रकूट में इतने कुशल डॉक्टरों, नर्सेज की टीम है इतना बड़ा आयुर्वेद संस्थान, एक भी अंग्रेजी दवा का प्रयोग नहीं, अच्छे रसों प्राणरक्षक दवाओं का विशाल संग्रह, स्वनिर्मित दवायें कि माँ को तो ३-४ दिन में आराम मिलने लगा। एम.डी. डॉ. अर्चना वाजपेयी जी समय से राउण्ड में आती थीं उन्होंने अंग्रेजी दवा १-१ करके पूरी एलोपैथिक दवा बन्द करवा दिया। इस समय इन्हें आराम है। लगभग सारी समस्यायें ठीक हैं। हमें पछतावा है कि हम इधर-उधर भटकते रहे और पहले ही माँ को यहाँ क्यों नहीं ले आये।
➡तब भी हम बहुत भाग्यशाली हैं जो माँ को सही समय में इलाज मिल गया मैं और मेरा पूरा परिवार खुश है, मेरा कमर का दर्द ठीक है। भूख अच्छी लगने लगी है। झुंझुनाहट भी ठीक है। मैं बहुत आभारी हूँ।
➡ नीरज कुमार पटेल, म.नं.-89, देवरी जगदीशपुर (विशभपुर), अमर पाटन, सतना (म.प्र.)
प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
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